Review

क्या खामोश मौत मर जाएगा दूरदर्शन?

आज 2009 में खड़े होकर हम इस टिप्पणी से कितना सहमत हो सकते हैं। जाहिर
तौर पर यह टिप्पणी एक बड़ी बहस की मांग करती है। अब जबकि देश में प्राइवेट
चैनलों की संख्या 450 के आसपास जा पहुंची है तो दूरदर्शन भी अपना परिवार
बढ़ाकर 30 चैनलों के नेटवर्क में बदल चुका है।

SAFMA Meet: Concern and Media’s Roles Discussed

The commercialization of mainstream media, degradation of media ethics
and practices in the country and the subsequent eroding public trust
and support to the entire media community were some of the relevant
issues those were discussed in a media conference held in Mumbai on
December 5 last.

आइबीएन-लोकमत पर शिवसेना हमला - पत्रकारों का बंटना लोकतंत्र पर खतरा

आईबीएन-लोकमत चैनल के मुबंई दफ्तर पर शिवसैनिकों के हमले के विरोध का स्वर बेहद दबा नजर आया। शिव सैनिकों के कुछ वर्ष पूर्व के मीडिया पर हमलों के विरोध को याद करें तो उसकी तुलना में तो इस बार का विरोध महज औपचारिक विरोध के रूप में सामने आया।

FLASH BACK

.. हुंह.. कितनी बडी-बडी बातें सुन रखी थीं: चौथा स्‍तंभ.. ओपि...
जी हां, लिब्रहान आयोग की सिफारिश पर अमल किया गया तो पत्रकारो...
Wrapping sandwiches or fish and chips in that morning’s news...